   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   (#)   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -+            +-   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   -+            *-
   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -*            +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   -* 
           +-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   -+           ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   ---           +-   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   -+            *-   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   ---   (#)   ---   ---   ---   ---